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बाइबिल बताती है कि हनोक तथा नूह ऐसे प्रथम दो प्रचारक थे जो परमेश्वर के साथ चले। उसके बाद परमेश्वर के हर एक प्रचारक ने ऐसा ही किया।
परमेश्वर ने नूह को जहाज़ बनाने को कहा। नूह ने शीघ्र परमेश्वर की आज्ञा सुनकर जहाज़ बनाना शुरू किया। जहाज़ बनाने के लिये जो खर्चा होगा उसके विषय नूह ने परमेश्वर से प्रश्न नहीं किया। नूह ने प्रश्न किया होता तो परमेश्वर कहता, ''पूरा खर्चा तुझे ही करना है।''
परमेश्वर के कार्य के लिये आपको ही अपनी जेब से खर्चा करना है, क्या ऐसा परमेश्वर ने आपको कभी कहा है? कई मसीही सेवक सोचते है कि वे सेवा करेंगे और खर्चा कोई और करेगा। परन्तु, नूह ने ऐसा नहीं सोचा। उसने स्वयं का तथा अपने परिवार का बोझ उठाकर परमेश्वर की सेवकाई की। जहाज़ बनाने के लिये आय कमाने हेतु उसे अतिरिक्त काम करना पड़ा। परन्तु उसने यह आनन्द से किया। परमेश्वर आज ऐसे लोगों की अपेक्षा करता है। यदि यीशु ने कहा है कि नूह के दिनों में जैसे दुष्ट लोग हुआ करते थे वैसे अंतिम दिनों में होंगे, तो अंतिम दिनों में नूह जैसे कई लोगों की परमेश्वर को आवश्यकता होगी। पौल जैसे सेवकों की आवश्यकता होंगी जिसने हाथों से काम करके रोजी रोटी कमाई और परमेश्वर की सेवा की।
लोगों ने नूह से पूछा होंगा कि प्राणी जहाज़ में कैसे प्रवेश करेंगे? नूह जानता था कि यह परमेश्वर का कार्य है। परमेश्वर ने अद्भुत रीती से प्राणीयों को जहाज़ में ले आया। नूह को जो कार्य सौंपा गया था कि वह जहाज़ बनाए वह कार्य उसने किया। बाकी सब चिंताएँ उसने परमेश्वर पर सौंप दी। हम भी उतनाही करें जितना परमेश्वर ने हमसे कहा है। हर असंभव बातें हम परमेश्वर पर छोड़ दे।
अंत में हम देखते है कि परमेश्वर ने द्वार को बन्द कर दिया (उत्पत्ति 7:16)। जहाज़ का द्वार परमेश्वर ने बन्द किया नूह ने नहीं। एक दिन उचित समय पर परमेश्वर उद्धार का द्वार बन्द करेगा ताकि कोई परमेश्वर के राज में प्रवेश न कर पाए।
जहाज़ यीशु मसीह तथा उसकी देह, कलीसिया को चित्रीत करता है। जिस तरह जहाज़ में कई दिनों तक रहना असुविधाजनक महसूस होगा उसी तरह कलीसिया में भी हो सकता है। कलीसिया में हमें उन लोगों के साथ मेलमिलाप रखना होता है जो हमसे भिन्न है तथा कई बार हमें रगेड़ते भी है। जहाज़ असुविधाजनक होते हुए भी उस समय वह पृथ्वी पर एकमात्र था जिसमें नूह
तथा उसका परिवार सुरक्षीत था। उसी प्रकार इस संसार में कलीसिया एकमात्र स्थान है जहां हम सुरक्षीत है। कलीसिया में तरह तरह के लोग होते हुए भी मैं कलीसिया में रहना पसंद करूंगा। आशा करता हूं कि आप भी पसंद करोगे। इसी कारण हम लोगों को कलीसिया में आमंत्रीत करते है।
जल प्रलय समाप्त हुआ तब नूह ने जहाज़ के बाहर कौअे तथा कबूतरी को भेजा। कौआ तथा कबूतरी देह तथा आत्मा को चित्रीत करते है। कौआ लौटा नहीं। कौअे ने मरे हुए लोगों की तथा जानवरों की लाश को देखा और वह आनन्दीत होकर उस पर खाने को बैठ गया। जो लोग अपने देह के अनुसार चलते है उन्हें संसार की बातों में आनन्द आता है। परन्तु कबूतरी तुरन्त लौट
आयी। आत्मा से चलने वाले लोग भी ऐसे होते है। वे संसार में खुश नहीं होते। वे तुरन्त परमेश्वर के लोगों की कलीसिया में तथा संगती में लौट आते है।
नूह जहाज के बाहर निकला तब सर्वप्रथम उसने परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिये वेदी पर होमबलि चढ़ाया (उत्पत्ति 8:20)। परमेश्वर को प्राथमिकता देना, उसकी आराधना करना और धन्यवाद देना आज के दिनों में हमारे लिये एक अच्छा उदाहरण है।
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