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सप्ताह का संदेश - Word For The Week

"सप्ताह का संदेश" - यह पत्रिका प्रतिएक सप्ताह प्रकाशित एवं वितरित की जाती है | प्रतिएक लेख/अंश, भाई जेक पुनन द्वारा लिखे लेखों /पुस्तकों एवं उपदेशों का अंश है
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परमेश्वर की करुणा
फ़रवरी 2010 (4) - जैक पूनन

योना 3:1-2 में हम पढ़ते हैं कि दूसरी बार योना के पास परमेश्वर का वचन आया : ''उठकर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और जो बात मैं तुझ से कहूँगा उसका उसमें प्रचार कर.'' परमेश्वर की स्तुति हो कि जब हम एक बार असफल हो जाते हैं, परमेश्वर हमें दूसरा मौका देता है. यही महान उपदेशों में से एक है जो हमें योना की पुस्तक से मिलता है. क्या आपने परमेश्वर की आज्ञा का पालन नहीं किया? परमेश्वर आपको एक और मौका देने की बाट जोह रहा है. क्या आप दूसरी बार भी चूक गए? वह आपको तीसरा मौका देगा. वह केवल दूसरे मौके का परमेश्वर नहीं है, क्योंकि हममें से अधिकांश लोगों ने बहुत पहले ही अपना दूसरा मौका खो दिया हैं. वह एक और मौका देनेवाला परमेश्वर है, इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप कितनी बार असफल हुए हैं! यदि आप पूरे हृदय से पश्चात्ताप करें तो परमेश्वर आपको अब भी पुनः बहाल कर सकता है और सेवा करने योग्य बना सकता हैं.

अब योना ने यह सबक सीख लिया था. उसे सुधारा गया था और अब वह खुशी से नीनवे को गया. उस शहर से होकर गुजरने और हर मार्ग पर घोषणा करने को कि 40 दिनों में नीनवे नाश कर दिया जाएगा, तीन दिन का समय लगा. आश्चर्यजनक रीति से नीनवे के लोगों ने तुरंत पश्चाताप किया. यह संसार के इतिहास में सबसे बड़ी और तत्काल होने वाली जागृति थी - और यह एक अन्यजातीय देश में हुआ. ऐसी जागृति पहले कहीं नहीं देखी गई थी. योना के उपदेश में केवल एक ही वाक्य था. परंतु, उसने लाखों लोगों में पश्चाताप लाया और उन सबने पश्चाताप किया.

हम यहाँ क्या देखते हैं? जब परमेश्वर ने उसके दास के साथ सफलतापूर्वक व्यवहार किया और उसमें कार्य किया, तब उसके मुँह से निकले हुए एक वाक्य में भी जबरदस्त सामर्थ थी. यदि परमेश्वर आपके हठ, अनाज्ञाकारिता, विद्रोह, घमंड को आापके भीतर से नहीं निकाल सका है तो आपके द्वारा प्रचार किया गया लंबा उपदेश किसी लाभ का नही. परंतु यदि परमेश्वर आपको तोड़ने में सफल रहा है तो एक वाक्य भी सामर्थशाली होगा.

राजा से लेकर एक भिखारी तक काफी रोना और पश्चाताप हुआ. उन्होंने टाट ओढ़ा और परमेश्वर से क्षमा याचना किया. वे जानते थे कि उन्हें दंडित किया जाएगा. और जब परमेश्वर ने यह देखा तो उसने उन्हें दंड नहीं दिया. एक बात जो मुझे यहाँ प्रोत्साहित करती है कि जब नीनवे जैसा दुष्ट शहर पश्चाताप किया तो परमेश्वर ने उस पर दया दिखाया. वह जानता था कि कुछ वर्षो के बाद शहर इतना दुष्ट हो जाएगा कि उसे नाश करना पड़ेगा. परंतु परमेश्वर हर किसी से वैसा ही व्यवहार करता है जैसा वह अभी है, वैसे नहीं जो वे पहले थे, या वैसे नहीं जो वे भविष्य में होंगे. उसका नाम ''मैं हूँ'' है, ''मैं था'' या ''मैं हूँगा'' नहीं है.

परमेश्वर हमसे ज्यादा स्नेही है. वचन में ऐसा एक भी मामला नहीं है जिसमें किसी व्यक्ति ने पश्चाताप किया और परमेश्वर की ओर फिरा और परमेश्वर ने उसे माफ न किया हो. यहाँ तक कि यदि यहूदा इस्कारियोत भी प्रभु के पास जाकर क्षमा मांगता तो वह माफ कर देता. परंतु इसके विपरीत वह याजकों के पास गया, जैसा कि आज कई लोग करते है. आप किसी याजक या पुरोहित के पास अपने पापों का अंगीकार करके क्षमा प्राप्त नहीं कर सकते. यहूदा इस्कारियोत ने इसकी कोशिश किया, परंतु क्षमा नहीं किया गया. और आप को भी इस तरह क्षमा प्राप्त नहीं हो सकती.

जब परमेश्वर ने नीनवे पर दया किया, तो आप सोचेंगे कि योना खुश हुआ होगा परंतु वह खुश नही था. कल्पना करें कि काई प्रचारक जो 1,20,000 लोगों के शहर को (योना 4:11) रोते और पश्चाताप करते देखे- जो इतिहास की सबसे बड़ी जागृति हो - और वह उत्साहित न हुआ हो, क्या ऐसा हो सकता है? लेकिन इसके विपरीत योना क्रोधित हो गया. सबसे प्रथम, क्योंकि उसकी भविष्यद्वाणी पूरी नहीं हुई थी. दूसरी बात, वांशिक इस्राएली होने के कारण वह नीनवे के लोगों से चिढ़ता था और आशा करता था कि वे पश्चाताप नहीं करेंगे और परमेश्वर उन्हें नाश कर देगा.

क्या हम योना के समान हैं? क्या पृथ्वी पर कोई ऐसा है जिसे आप नहीं चाहते कि परमेश्वर आशीषित करे? क्या हम भूल गए हैं कि परमेश्वर हमारे साथ कितना दयालू था और हमें किस तरह आशीषित किया जब हमें केवल नर्क की सजा ही मिलनी थी? परंतु भविष्यद्वक्ता होने के कारण योना को उसके अपने सम्मान और प्रतिभा की चिंता थी.

योना को सबक सिखाने के लिये परमेश्वर ने एक पौधे को उससे भी उपर तक बढ़ने दिया. योना इस पौधे से बहुत खुश हुआ. परंतु अगले दिन परमेश्वर ने एक कीडा को वह पौधा खाने दिया जिससे वह सूख गया. योना फिर से बहुत नाराज हो गया क्योंकि उसे सूर्य की गर्मी से तकलीफ हो रही थी. और फिर उसने कहा, ''मेरे लिये जीने से मर जाना अच्छा है.'' तब परमेश्वर ने योना से कहा, ''तुझे उस पेड़ के लिये तरस है जो एक ही रात में हुआ और एक ही रात में नष्ट भी हुआ. फिर यह बड़ा नगर नीनवे जिसमें एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं जो अपने दाहिने बाएँ हाथों का भेद नहीं पहिचानते और बहुत से घरेलू पशु उसमें रहते हैं तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊँ?'' (योना 4:11). परमेश्वर ने नीनवे के 1,20,000 अबोध बालकों और पशुओं के प्रति उसकी चिंता को व्यक्त किया. यहाँ नीनवे में पशुओं के प्रति परमेश्वर की चिंता को देखना अद्भुत बात हैं. ''धर्मी अपने पशु के भी प्राण की सुधि रखता है'' (नीतिवचन 12:10).

अनुवादक : विनोद टॊडॆ     அச்சு வடிவம்    इसे भेजें



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